अधूरी चिट्ठियाँ – भाग 3: प्लेटफ़ॉर्म नंबर चार

लेखक: Desi Garam Kahani श्रेणी: रोमांटिक कहानियाँ, प्रेम कहानियाँ 1 मिनट पढ़ना प्रकाशित:

20 पिक्सल

शनिवार की सुबह चारबाग़ स्टेशन पर वही पुरानी भीड़ थी: चाय के कुल्हड़, सामान ढोते कुली और लाउडस्पीकर पर गूँजती घोषणाएँ। नेहा प्लेटफ़ॉर्म नंबर चार पर खड़ी थी और बार-बार अपनी घड़ी देख रही थी।

ट्रेन आधा घंटा देर से आई। जब डिब्बों के दरवाज़े खुले तो उसकी साँस जैसे गले में अटक गई। भीड़ के बीच से आरव उतरा, थोड़ा थका हुआ, थोड़ा बदला हुआ, पर वही मुस्कान लिए।

दोनों कुछ क़दम की दूरी पर रुक गए। तीन साल की ख़ामोशी इतनी आसानी से नहीं टूटती। फिर आरव ने जेब से वही नीला लिफ़ाफ़ा निकाला और कहा, “यह मैंने कभी तुम्हें भेजा ही नहीं था।”

नेहा हँस पड़ी और उसकी आँखें भी भर आईं। उसने कहा, “तो चलो, इसे अब साथ बैठकर पढ़ते हैं। पर पहले चाय।”

स्टेशन की उसी पुरानी बेंच पर बैठकर दो कुल्हड़ चाय के साथ उन्होंने वे सारी चिट्ठियाँ पूरी कीं जो इतने सालों से अधूरी पड़ी थीं।

(सीरीज़ समाप्त)

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